बैंक कर्मियों द्वारा हड़ताल व जंगी प्रदर्शन, बैंक मर्जर का बैंक कर्मियों द्वारा विरोध


मन्दसौर। नौ बैंक यूनियन के शीर्ष संगठन यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने सरकार के तीन सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक्स बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक, विजया बैंक के एकीकरण के निर्णय का तीव्र विरोध किया है। बढ़ते हुए कारपोरेट सेक्टर के खराब ऋणों को न वसूल कर, ध्यान भटकाने के लिये इन ऋणों की वसूली के बजाय बैंक मर्जर जैसे निर्णय लिये जा रहे हें। इसके विरोध स्वरूप देशभर में 10 लाख बैंक कर्मियों ने हड़ताल व प्रदर्शन किये। मंदसौर में भी गांधी चौराहे पर जिले के बैंक कर्मियों ने हड़ताल के दौरान जयकर प्रदर्शन व नारेबाजी की।
वक्ताओं ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि बैंक मर्जर कारपोरेट घरानों के खराब ऋणों से ध्यान भटकाने वाली कार्यवाही है। बैंक मर्जर का आज तक कोई तर्कपूर्ण जवाब नहीं है। भारतीय स्टेट बैंक में सहयोगी बैंकों को मिलाने के बाद शाखाएं कम हुई, व्यवसाय घटा, रोजगार घटा, एनपीए बढ़ा, नया रोजगार नहीं मिला, लाभ भी कम हुआ। इस प्रकार बैंक मर्जर अतार्किक एवं अवांछित है। देश में जहां बैंक शाखाएं बढ़ाने की बात हो रही है, सरकार बैंकों के विस्तार पर रोक लगाकर क्या दर्शाना चाहती है।
खराब ऋ़णों की वसूली न कर मर्जर जैसे कदमों से स्पष्ट है कि वे किन्हें बचाना चाहती है। किनके हितों की रक्षा कर रहे है ? कई कारपोरेट घरानों ने बकाया ऋणों का 40 से 50 प्रतिशत ऋणों का भुगतान किया, जिससे करोड़ों रूपये का बैंको को नुकसान हुआ है। दूसरी और खराब ऋणों का दण्ड आम ग्राहकों से पेनल्टी के रूप में करोड़ों रूपये वसूलकर भरपाई कर रहे है। बैंक यूनियन इसका विरोध करती है। यह सांठगांठ पूंजीपतियों और नीति निर्माताओं की है जिसके तहत बैंक मर्जर जैसे कदम उठाये जा रहे है। जो कि गैर जरूरी है। ये बैंकों को निजीकरण की ओर ले जाने का प्रयास है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि बैंक कर्मियों का वेतन समझौता समाप्त हुए एक वर्ष से अधिक समय हो गया है किन्तु समझौते में नई शर्ते लादकर वेतन समझौते में अनावश्यक देरी की जा रही है। वेतन वृद्धि को 2 प्रतिशत से शुरू किया था जो अभी तक 8 प्रतिशत पहुंची है जिससे बैंक कर्मियों में आक्रोश हैं वेतन पुनरीक्षण, पुरानी पेंशन योजना सभी को लागू करने जैसे कई मुद्दे लंबित है इन पर तुरंत निर्णय लिया जाये व एक सम्मान जनक वेतन समझौता लागू किया जावें
प्रदर्शन को महेश मिश्रा, संजय सेठिया, राम अजमेरा, श्रीनिवास मोड़, अनिल जैन, गजेन्द्र तिवारी, सुरेन्द्र संघवी, एस.आर. शास्ता, संतोष गुर्जर, सोनम गुप्ता, कीर्ति मोदी, विनोद जैन, अब्दुल हमीद खान आदि ने संबोधित किया।
उपस्थित रहे- विकास जैन, कैलाश मांझी, मनीष कोठारी, विरेन्द्र भावसार, रवि गेहलोद, गोवर्धन चौहान, संजय शुक्ला, शैलेष पाठक, अनिल राजोरिया, अरविन्द पाटीदार, बी.आर. गेडाम, विशाल गुप्ता, यश मीणा, नरेन्द्र श्रीवास्तव, रमेश देवड़ा, जसवंत देवड़ा, सुनील जैन, राजेन्द्र गुप्ता, संजय सेठिया सीबीआई, कोमल पण्ड्या, कन्हैयालाल जाटव, प्रफुल्ल जोशी, अविनाश कुमार, राधेश्याम चौहान, कृष्णा पाटीदार, मोहित राठौर, जितेन्द्र परमार, अशोक सिंगार, प्रशांत, पियुष घाटिया, सुरेश पाल, गोपालसिंह चन्द्रावत, बाबूलाल सौलंकी, शिवरमन पाटीदार, रोशन सैनी, मिथुन राठौर, विपुल जैन, दिनेश वर्मा, कंचनबाई, दिव्या गुप्ता, अंगुरबाला तोमर, प्रांजल मांदलिया, अमृतकुंवर देवड़ा, कीर्ति दत्ता, आरती चौधरी सहित कई बैंक कर्मी उपस्थित थे। संचालन जिनेन्द्र राठौर ने किया एवं आभार प्रदर्शन भरत नागर ने किया।

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