रोजगार के मसले पर बजट मौन, गिरती अर्थव्यवस्था के मामले में बजट में प्रावधान नही

मंदसौर। केन्द्र की मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल के प्रथम बजट में देश की सबसे बडी बेरोजगारी की समस्या के निदान हेतु कोई प्रावधान नही किया गया है। इस बजट से मध्यमवर्गीय वर्ग को निराशा हाथ लगी है। प्रस्तुत बजट देश की मुख्य समस्याओं के समाधान पर मौन होने के साथ ही जनता को राहत एवं जनकल्याण हेतु कोई दृष्टी दिखायी नही देती है।
जिला कांग्रेस प्रवक्ता एवं इंटक अध्यक्ष सुरेश भाटी ने केन्द्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि सरकार यह तय नही कर पा रही है कि उसे किस दिशा में जाना है। पहले कार्यकाल मे स्मार्ट सीटी पर फोकस करने वाली अब ग्राम की बात को कर रही है लेकिन ग्रामीण विकास के लिये बजट में पूर्व मे जारी योजनाओ के अलावा कुछ नही है। देश के सबसे बडे मध्यमवर्गीय परिवारो राहत हेतु कदम नही उठाये गये। पेट्रोल एवं डिजल के नाम पर एक-एक रूपया अतिरिक्त कर लगाकर बोझा डालने का कार्य सरकार ने किया है।
श्री भाटी ने कहा कि लगातार गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने की दिशा में प्रस्तुत बजट को देखकर यह साफ होता है कि बिगडले आर्थिक ढांचे के सुधार हेतु सरकार के पास कोई विजन नही है।

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