मंडी अधिनियम में संशोधन कर प्रदेश सरकार ने लाखो हम्मालो, तुलावटियो का भविष्य अधर में डाला- भाटी


संशोधन से निजी क्षेत्र को लाभांवित करने एवं मंडी ढांचे को शिथिल करने का प्रयास

मंदसौर। कोरोना काल में शिवराजसिंह चैहान सरकार ने जो तुगलकी निर्णय लिये है उसके कारण सबसे अधिक दुरगार्मी प्रभाव मजदूरो पर पडता निश्चित है। पूर्व में श्रम अनिधियम में संशोधन कर औघोेगिक मजदूरो के हितो को कमजोर किया गया वही अब 1 मई को 2020 को मंडी अधिनियम 1972 को बदलाव लाते हुये कृषि उपज खरीदी कार्य को निजी क्षेत्र के दखल में लाते हुये आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम से बाहर कर दिया है जिसके कारण जमाखोरी को बढावा मिलेगा ही साथ ही प्रदेश के लाखो मजदूरो जिसमें हम्मालो एवं तुलावटियो का रोजगार भी संकट बढेगा।
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस ( इंटक) के जिला अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस प्रवक्ता सुरेश भाटी ने बताया कि शिवराजसिंह चैहान की नितियां मजदूरो, किसानो, व्यापारियो सहित अन्य वर्गो के लिये विनाशकारी साबित हो रही है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश सरकार ने कोरोना काल में जिस प्रकार से मंडी अधिनियम 1972 में बदलावा किया है उसके कारण अब निजी क्षेत्र का सीधे रूप से मंडी में दखल हो गया है। निजी औघोगिक घरानो द्वारा मंडी संचालित करने की अनुमति दी जाने के साथ ही अब कृषि उपज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिये जाने से जमाखोरी का बढना निश्चित है। श्री भाटी ने मंडी क्षेत्र में निजी व्यक्तियो के प्रवेश के कारण मंडियो में कार्यरत मजदूरो एवं हम्मालो के रोजगार पर भविष्य में संकट बडने का दावा करते हुये कहा कि सीधे इलेक्ट्रानिक्स तोल कांटो से खरीदी करने एवं अन्य व्यवस्थाओं में बदलाव के कारण हम्मला एवं तुलावटियो का रोजगार समाप्त होना तय है। इसके साथ ही भविष्य में किसानो के हितो से किनारा करने के लिये सरकार पृष्ठभूमी तैयार कर रही है।
अंत में श्री भाटी ने मंडी अधिनियम 1972 को संशोधित को मजदूर विरोधी एवं किसान एवं व्यापारियो के लिये भी अहितकर बताते हुये शिवराजसिंह चैहान सरकार की आलोचना करते हुये मजदूर हित में इसे वापस लेने हेतु आग्रह किया है अन्यथा कांग्रेस आगामी दिना में आंदोलन हेतु बाध्य होगी।