श्रावण मास के अंतिम सोमवार को मंदिर परिसर में निकलेगी, शाही सवारी


मंदसौर। परंपरानुसार श्रावण मास के अंतिम सोमवार 03 अगस्त रक्षा बंधन के पावन पर्व पर जग प्रसिद्ध भूत-भावन भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव की शाही सवारी पशुपतिनाथ मंदिर प्रांगण में ही निकलेगी। विश्वव्यापी महामारी कोरोना कोविड 19 के कहर के कारण सोशल डिस्टेसिंग के साथ भव्य रथ में भगवान की रजत प्रतिमा के दर्शन भक्तजन मंदिर परिसर में ही कर सकेगें और इस कोरोना माहमारी से निजात पाने की कामना को लेकर भक्ति में डुबेगें। आयोजन को लेकर तैयारीयां जोरो-शोरों से शुरू हो गयी है।
भगवान श्री पशुपतिनाथ प्रातः काल आरती मण्डल के अध्यक्ष पं.दिलीप शर्मा प्रवक्ता उमेश परमार ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि, श्रावण मास के अंतिम सोमवार को हर वर्ष भूत-भावन भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव नगर भ्रमण पर निकलते है और असंख्य जनसमुदाय शाही सवारी में सम्मिलित होता है ओर भगवान के दर्शन करता है, परंतु इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण शासन के नियमों के अनुसार पशुपतिनाथ मंदिर प्रांगण में ही शाही सवारी का अनुंठा आयोजन होगा। भगवान की रजत प्रतिमा के दर्शन वर्ष भर में श्रावणमास के अंतिम सोमवार को ही धर्मालुजन करते है। भगवान की रजत प्रतिमा का भव्य श्रंृृगार कर रथ को सुसज्जित किया जावेगा और रथ के आसपास रस्सी लगा दी जावेगी ताकी भक्तजन दूर से ही सोशल डिस्टेसिंग के साथ दर्शन कर सकें। उन्होंने बताया कि, प्रातः 8 बजे विद्धान पण्डितों के आर्चत्व में पशुपतिनाथ मंदिर परिसर स्थित हॉल में भगवान की प्रतिमा का दुध,दही,घी, शक्कर, शहद से निर्मित पंचामृत से अभिषेक पूजन किया जावेगा, इसके पश्चात भगवान की रजत प्रतिमा का अबीर गुलाल, अक्षत एवं विशेष फूलों से श्र ृृंगार कर भगवान को प्रातः 11 बजे रथ में विराजित किया जावेगा, इसके बाद भक्तजन बारी बारी से दर्शन करते रहेगें और संध्या 5 बजे तक भगवान की रजत प्रतिमा के दर्शन मंदिर स्थित प्रांगण में होते रहेगें। उन्होंने बताया कि, हर वर्ष भगवान की रजत प्रतिमा का पूजन अर्चन आरती करने के पश्चात पुलिस प्रशासन द्वारा एक चार के गार्ड द्वारा भगवान को सलामी दी जाती है उसी अनुरूप प्रांगण में ही भगवान को सलामी दी जावेगी। उन्होंने भक्तजनों से मास्क पहनकर आने का और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने का आव्हान किया ।