कोराना वायरस के कारण न्यायालयो में बंद कार्य पुनः आरंभ करने हेतु अनुरोध


मन्दसौर। अभिभाषक संघ मन्दसौर के पूर्व अध्यक्ष श्री प्रकाश रातडिया ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, इन्दौर पीठ के प्रशासकीय न्यायाधीश,मन्दसौर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बार कौंसिल आफ मध्यप्रदेश जबलपुर के अध्यक्ष एवं अभिभाषक संघ मन्दसौर के अध्यक्ष को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि कोराना वायरस के कारण न्यायालयों में बंद कार्य पुनः आरम्भ किये जाये। पत्र में अनुरोध किया गया कि वैश्विक महामारी कोराना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं सर्तकता को ध्यान मे रखकर मध्यप्रदेश के सभी न्यायालयो में सामान्य कार्य बंद कर दिया गया है। केवल अति आवश्यक कार्य एवं अंतिम तर्क के मामलो की विडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से सुनवाई की जा रही है। यह स्थिति माह मार्च 2020 से अभी तक निरंतर है। सामान्य कार्य बंद होने के कारण सर्वसाधारण जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। न्याय व्यवस्था के अवरूद्ध होने के दुष्परिणाम नागरिको के अधिकारो के साथ-साथ समाज की व्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत के संविधान मे नागरिको को जो अधिकार प्राप्त है इससे वंचित हो रहे है। श्री रातडिया ने पत्र में उल्लेख किया कि कोराना वायरस महामारी के संक्रमण से बचाव आवश्यक है किन्तु लोगो को संविधान की व्यवस्था के अनुसार न्याय प्राप्त हो यह भी आवश्यक है। न्यायालयो को अनन्तकाल तक बंद नहीं रखा जा सकता है। इसलिये वायरस के संक्रमण के प्रति आवश्यक सर्तकताऐं सुनिश्चित करते हुए न्यायालयो का सामान्य कार्य आरम्भ किया जाना आवश्यक है। सामान्यतया दाम्पत्य विवादों एवं महिलाओं संबंधी अपराधो की सुनवाई बंद न्यायालय कक्ष मे किये जाने का प्रावधान है। ऐसी व्यवस्था प्रत्येक मामले के लिये की जा सकती है। सीमित संख्या मे मामले कार्यवाही एवं सुनवाई हेतु नियत किये जाये तथा प्रकरण की कार्यवाही एवं सुनवाई से संबंधित पक्षकारो एवं अभिभाषको को ही उपस्थित होने की अनुमति देते हुए सुनवाई की जा सकती है। भीड़ एकत्रित न हो इस संबंध मे आवश्यक उपाय किये जा सकते है। यह उल्लेखनीय है कि पुरे देश मे अनलॉक प्रक्रिया आरंभ होने के उपरांत विभिन्न क्षेत्रो में गतिविधियो सामान्य हो चुकी है तथा प्रत्येक विवेक सम्पन्न नागरिक अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। सीमित संख्या में मामलो की सुनवाई ,सीमित उपस्थिति मे सुनवाई, मास्क एवं अन्य सुरक्षा सर्तकता सुनिश्चित करते हुए सुनवाई एवं अन्य इसी प्रकार के अन्य प्रतिबंधो के साथ न्यायालयो में सामान्य कामकाज आरम्भ किया जाना उचित एवं आवश्यक है।