सरकारें व उनकी व्यवस्था तो फेल हो चुकी है-डॉ राघवेंद्रसिंह तोमर


मन्दसौर – इतना असहाय, असमर्थ कभी अनुभव नहीं किया। एक इंसान होने के नाते चाहकर भी गुहार लगा रहे, मदद माँग रहे, तड़प रहे सभी ज़रूरतमंदो की मदद नहीं कर पा रहा।अस्पतालों में फोन लगाओ तो जवाब आता है- “कुछ नहीं कर सकते सर!  बेड नहीं है। इंजेक्शन नहीं है, ऑक्सीजन नहीं है। कैसे मदद करें?” नागरिकों के लिए एक तरफ बेपरवाह व भ्रष्ट सरकारी व्यवस्था का अंधा कुआं है तो दूसरी तरफ काला बाज़ारी, मुनाफाखोरी और आँकड़ों की हेरा-फेरी। भ्रष्ट सरकार धृतराष्ट्र की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठी है। लोगों को मरते छोड़ सरकार बस मौत के आँकड़ों को कम करने में लगी है।हमारी पार्टी और कार्यकर्ता लगातार लोगों की मदद कर रहे है लेकिन एक सीमा के बाद ऑक्सिजन नहीं मिल पाती, अस्पतालों में बेड नहीं मिल पाते। हम सीमित संसाधनों के साथ लोगों की मदद करने के लिए आगे बढ़ते हैं तो हाथ ऊपर कर चुकी सरकार और उसकी भ्रष्ट सरकारी व्यवस्था दीवार बनकर रास्ता रोक देती है।बीते एक वर्ष में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों व स्टाफ की पूर्ति नहीं कर पाए,ऑक्सीजन, वेंटिलेटर व दवाइयों की व्यवस्था नहीं जुटा पाए और न ही इस महामारी से ताकत से लड़ने के लिए आवश्यक संसाधन जुटा पाए सिर्फ विज्ञापनों में लगे रहे ।प्रदेश सरकार की आम लोगों की तकलीफ दूर करने की कोई मंशा ही नहीं है। सरकार बस विज्ञापन देकर और आँकड़ों को कम कर धूल झोंकने के फ़िराक में है।अब तो ईश्वर से ही प्रार्थना है कि सबकी इस कोरोना महामारी से रक्षा करे 

एक नजर