स्व. राजीव गांधी के प्रधानमंत्रीतत्व काल ने देश को नई दिशा दी


( पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की पुण्यतिर्थि 21 मई के उपलक्ष्य में विशेष)
भारत में नेहरू- गांधी परिवार का योगदान देश के स्वाधीनता संग्राम से लेकर स्वतंत्र भारत के विकास में रहा है। पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिराजी एवं उसके बाद राजनिति में बिना किसी प्लानिंग की बजाय आकस्मात आगमन स्व. राजीवजी गांधी का हुआ। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को हआ था। राजीवजी की प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली के शिव निकेतन विधालय में हुई उसके बाद राजीवजी ने देहरादून के वेल्लम विधालय में से दाखिल प्राप्त कर आईएससटी की परिक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सीनियर केब्रीज में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये इंग्लेण्ड चले गये। उनकी राजनिति मे आने की मंशा नही थी। राजनिति मे अकस्मता आने के पूर्व वे इंडियन एयरलाइंस में पायलेट थे। देश की सशक्त नेतृत्व इंदिराजी के जाने के बाद राजीवजी ने बिना राजनैतिक अनुभव के जिस कुशलता से देश की बागडौर संभाली उसी के कारण उनके कार्यकाल में लिये गये दुरगार्मी फैसलो ने देश को नई दिशा दी। 31 अक्टोबर 1984 को इंदिराजी की हत्या के बाद बहुमत से सरकार संचालित करने वाली कांग्रेस दल ने बिना देरी के राजीवजी को सत्ता सौपते हुये अब तक के सबसे युवा व्यक्ति के हाथो में शासन सौप दिया। साधारण व्यक्तित्व एवं बातो में सच्चाई लिये जब देश में 44 साल के युवा ने पद संभाला तो राजनैतिक पंडितो के सारे अनुमान गलत साबित हुये। लोकसभा चुनाव में इंदिराजी की हत्या के बाद हुये लोकसभा चुनाव राजीवजी के नेतृत्व में लडा गया जिसमें कांग्रेस ने अकेले 425 लोकसभा सीटे जीती थी।
दूरसंचार क्रांति की शुरूआत
जितना वृहद बहुमत उतनी ही अपेक्षाये, इन अपेक्षाओ के भाव लिये राजीवजी ने जिस प्रकार से कदम उठाये उसके कारण कई ऐतिहासिक परिवर्तन देश और भारतीय राजनिति में देखने को मिले। राजीवजी को ही भारत में दूरसंचार क्रांति का जनक कहां जाता है। आज जिस डिजिलट इंडिया की बाते होती है उसकी कल्पना राजीवजी गांधी ने ही की थी। उनकी पहल पर अगस्त 194 में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना के लिये सेंटर पार डिवेलपमेंट आॅफ टेलीमेटिक्स की स्थापना हुई। उनकी पहल के बाद जगह-जगह पीसीओ खुलने लगे जिससे गांव की जनता भी संचार से जुड सकी। 1986 में राजीवजी की पहल से ही एमटीएनएल की स्थापना हुई जिससे दूरसंचार क्षेत्र में ओर प्रगति हुई। उस समय उनके द्वारा उठाये गये कदमो के चलते तत्कालिन समय के अनेक देश जो भारत से आगे थे वे संचार के मामलो में भारत से पीछे आ गये।
वोट देने की उम्र घटाई
भारत में वोट देने की आयु राजीवजी के कार्यकाल से पहले 21 वर्ष निर्धारित थी। उन्होनें देश के विकास में युवाओ के योगदान को बढाने की मंशा से संविधान के 61 वे संशोधन द्वारा वोट देने की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की दी। इस फैसले से देश में मतदाताओ का प्रतिशत बढ गया। हालांकि उनके इस फैसले का नुकसान लोकसभा चुनाव में हुआ किन्तु उसके बावजुद उन्होनें इस फैसले को राजनितिक लाभ की बजाय सिर्फ दुरगार्मी परिवर्तन आधार बताकर अडिग रहे।
पंचायती राज व्यवस्था को किया सशक्त
पंचायती राज व्यवस्था को जो ढांचा वर्तमान मे है उसके स्वप्न दृष्टा स्व राजीव गांधी ही थे। महात्मा गांधी के ग्रामो उत्थान की भावना को अंगीकार करते हुये पंचायती राज व्यवस्था का पुरा ढांचा तैयार किया। 21 मई 1991 को उनकी हत्या के बाद संविधान के 73 वे एवं 74 वे संशोधन के जरिये पंचायतीराज व्यवस्था का उदय हुआ। 24 अप्रेल 1993 को पुरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागु हो गयी। इसके अतिरिक्त वर्तमान में नवोदय विधालय जिसमें दो करोड से अधिक विधार्थी पढते है उसकी स्थापना एवं ढांचे का निर्माण का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष ने राजीवजी को छिन लिया
राजीवजी ने कभी भी राजनैतिक लाभ एवं मंशा से कार्य नही किया। श्रीलंका में एलटीटीई जिसे भारत के तमिलनाडु राज्य के तमिलो का समर्थन प्राप्त था उसके द्वारा फैलायी जा रही हिंसा को वे शांति के लिये खतरा मानते थे। उन्होनें श्रीलंका में शांति स्थापना हेतु वहां भारतीय सेना भेजी। इस दौरान उन पर श्रीलंका यात्रा में हमला भी हुआ किन्तु उसके बावजुद वे पीछे नही हटे। श्रीलंका में आतंकवाद की झुलस रही आग को ठंडा करने की मंशा उनके लिये प्राण घातक साबित हुई। स्व इंदिराजी के बाद गांधी परिवार में दुसरी हत्या राजीवजी की हुई जिसमें 21 मई 191 को तमिलनाडू के श्री पेरंबदूर में बम लास्ट में उनकी जान चली गयी।
वर्तमान में आज नेहरू गांधी परिवार के प्रति देश के युवाओ को राजनैतिक आधार पर गलत जानकारियां परोसकर उन्हें प्रभावित किया जा रहा है लेकिन नेहरू गांधी परिवार ने तमाम सुख सुविधा, धन संपदा होेने के बावजुद अपना श्रेष्ठ से श्रेष्ठ योगदान देश के स्वाधीनता संग्राम से लेकर स्वतंत्र भारत के विकास में किया है। अपने प्रधानमंत्री काल में जिस सच्चाई एवं ईमानदारी से कार्य किया उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। स्व राजीव गांधी पर विपक्ष के नेताओ द्वारा तीखे हमलो के बावजुद पुरा सम्मान और उनके लिये बिना किसी प्रचार-प्रसार के सहयोग के किस्से आज भी देश की राजनिति में गिने एवं सुनाये जाते है। राजीवजी को आतंकवादी हमले ने देश से छिन लिया लेकिन अगर वे जीवित होते तो आज देश एक नये मुकाम पर होता। उनका स्वर्गीम कार्यकाल, देश के लिये किया गया बलिदान कभी भुलाया नही जा सकता है। उनकी पुण्यतिर्थि पर अगर संभव हो सके तो हमे उनके जीवन और राजनितिक कार्यकाल के कुछ पन्ने उलटकर जरूर पढना चाहिये जिससे भारतीय राजनिति की वर्तमान गंदगी एवं धुंध से आगे भी कुछ दिखायी दे।
आलेख
सुरेश भाटी
प्रवक्ता
जिला कांग्रेस मंदसौर