निष्क्रियता के कारण मां शिवना का मुद्दा पहुंचा न्यायालय की चौखट पर

मन्दसौर। विगत 20 वर्षों तक लगातार संघर्ष के बाद नगर के साथ क्षेत्र के कई संगठनों एवं जनता के द्वारा अभियान चलाने के बाद जब जिम्मेदारों द्वारा सुना नहीं गया तो देश की न्यायपालिका को सर्वाेच्च मानकर न्यायालय के दरवाजे पर भगवान पशुपतिनाथ का उत्पत्ति गर्भ गृह मां शिवना के आंचल की लड़ाई बुधवार गणेशजी के शुभ दिन पर लोक उपयोगी लोक अदालत जिला न्यायाधीश मोहम्मद रईस खान के समक्ष एडवोकेट प्रहलादराय गुप्ता, राधेश्याम सिखवाल, महेश मोदी, महेश समंदर, अजय सिखवाल, सत्येंद्रसिंह सोम द्वारा मंदसौर की जनता की तरफ से याचिका दायर की गई।  नगर के इस लड़ाई में अपनी भागीदारी करने वाले मंदसौर क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक संगठन मिशन मंदसौर के प्रमुख सुनील बंसल, निर्मल शिवना अभियान के प्रमुख हरिशंकर शर्मा, गायत्री परिवार के केशव शिंदे, निर्मल शिवना अभियान के शत्रुंजय सोनी की उपस्थिति में यह याचिका प्रस्तुत की गई। लंबे समय से न्यायालय की चौखट पर यह मुद्दा पहुंचने वाला था लेकिन भगवान और मां शिवना को न्यायालय में पहुंचाने का मन नहीं था। जब निष्क्रियता चरम सीमा पर पहुंच गई जवाबदार द्वारा किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया गया आखिर यह निर्णय लेना पड़ा। इस अभियान को लेकर नगर में काफी चर्चा का विषय बन चुकी है कि जब जनता के प्रमुख जीवनदायिनी शिवना को लेकर जवाब नहीं दे रहे हैं, करोड़ों की योजनाएं फेल होने के बाद भी निर्भीक तरीके से घूम रहे हैं तो आने वाला समय क्या होगा ? इस समय न्यायालय के साथी जन आंदोलन सतत चलता रहेगा वह रुकने वाला नहीं। एडवोकेट राधेश्याम सिखवाल बताया हम इस मुद्दे की लड़ाई को बहुत ही जवाबदारी से लड़ेंगे और हमें विश्वास है तत्काल इस पर कार्रवाई भी होगी। प्रहलाद राय गुप्ता ने बताया 20 वर्षों का रिकॉर्ड हमारे द्वारा साथ में पेश किया जाएगा और किन कारणों से नालों को रोका नहीं लगा गया आने वाले समय में चंबल का पानी भी गंदगी का गढ़ बन जाए इससे पहले हमें जागरूक होने की जरूरत है। हर व्यक्ति को इसी प्रकार जवाबदारी से कार्य करना होगा।