कांग्र्रेस के लिये मुस्लिम और राजपूत तो भाजपा के लिये पिछडे और सामान्य मतदाता रहे है जीत की चाबी

मंदसा/ जावरा। मंदसौर संसदीय क्षेत्र की जावरा विधानसभा क्रमांक 222 का संसदीय क्षेत्र की राजनिति में हमेशा से ही बडा महत्व रहा है। इस विधानसभा से वरिष्ठ सांसद रहे स्व डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय एवं पूर्व मंत्री स्व महेन्द्रसिंह कालूखेडा आते है। वर्तमान में में भले ही जावरा विधानसभा सीट भाजपा को पास हो लेकिन इस सीट पर बदल- बदलकर जनता जनादेश देती रही है। जावरा विधानसभा सीट के जीत के गणित एवं जातिय समीकरण आदी पर अगर मंथन किया जाये तो यह साफ है कि कांग्रेस के लिये मुस्लिम एवं राजपूत मतदाता तो भाजपा के लिये सामान्य एवं पिछडा वर्ग के मतदाता जीत की चाबी रहे है। कडे मुकाबले वाली इस सीट के लिये वर्तमान में कांग्रेस से पूर्व मंत्री महेन्द्रसिंह कालूखेडा के अनुज केकेसिंह कालूखेडा, वरिष्ठ नेता डॉ हमीरसिंह राठौड, जिला पंचायत उपाध्यक्ष डीपी धाकड एवं पूर्व नपाध्यक्ष श्री यूसूफ कडप्पता दावेदार है तो भाजपा की ओर से वर्तमान विधायक राजेन्द्र पांडेय, भाजपा जिलाध्यक्ष कानसिंह चौहान, नपाध्यक्ष अनिल दसेडा एवं स्व प्रहलाद पोरवाल के पुत्र सुनिल पोरवाल भी दावेदारी में है।
आठ बार कांग्रेस तो तीन बार भाजपा एवं बाकी में समय-समय पर दर्ज की है जीत
जानकारी के अनुसार जावरा विधानसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू ने 1957 में यहां से नेतृत्व किया था। उसके बाद 1962 लक्ष्मीनारायण पांडेय ने जेएस से जीत दर्ज की। 1967 में कांग्रेस से बंकटलाल यहां से विधायक बने तो 1972 में फिर से बंकटलाल तोडी को ही जीत हासिल हुई। 1977 की इंदिरा विरोधी लहर में कोमलसिंह राठोड ने जेएनपी से चुनाव जीते वही 1980 में फिर से यह सीट इंदिरा कांग्रेस के हिस्से आयी और कुंवर भारतसिंह यहां से चुने गये। 1985 में पूर्व गृह मंत्री भारतसिंह जावरा यहां से चुनकर मंत्री पद तक पहुंचे तो 1990 में भाजपा के रूखनाथसिंह आंजना यहां से चुनाव जीतकर विधानभा में पहुंचे। 1993 एवं 1998 में महेन्द्रसिंह कालूखेडा विधायक बनकर मध्यप्रदेश शासन में मंत्री रहे। 2003 में पूर्व सांसद डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय के पुत्र राजेन्द्र पांडेय यहां से चुनाव जीते तो 2008 में महेन्द्रसिंह कालूखेडा फिर से सीट हथियाने में सफल रहे। 2013 में यहां से डॉ राजेन्द्र पांडेय की वापसी संभव हुई।
कांग्रेस के लिये मुस्लिम एवं राजपूत मतदाता मुख्य ताकत
अब तक जावरा विधानसभा से कांग्रेस ने अधिकांश बार राजपूत वर्ग से उम्मीदवार ही अधिक उतारे है। पूर्व मंत्री भारतसिंह जावरा से लेकर महेन्द्रसिंह कालूखेडा तक राजपूत समाज से उम्मीदवार उतारे जाने के कारण इस सीट से राजपूत मतदाता कांग्रेस के साथ राजनैतिक आंकडो एवं वोटो की संख्या के आधार पर देखे जा सकते है, जबकी जावरा शहर के लगभग 45 प्रतिशत मुस्लिम आबादी ने भी कांग्रेस के पक्ष में आने से ताकत और बढा देती है। वर्तमान समय में पूर्व मंत्री महेन्द्रसिंह कालूखेडा के अनुज केकेसिंह कालूखेडा व डॉ हमीरसिंह राठौड की दावेदारी मुख्य रूप से है जिसके चलते दोनो ही दावेदारो मे से टिकट का फैसला होने की राजनैतिक जानकार संभावना बता रहे है। इसके अलावा किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डीपी धाकड जो कि जिला पंचायत के उपाध्यक्ष है उनकी दावेदारी भी क्षेत्र में प्रभावी ढंग से उभरी है। 2013 में यहां से मुस्लिम उम्मीदवार रहे पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष यूसूफ कडप्पा भी फिर से कांग्रेस से टिकट मांग रहे है।
भाजपा के लिये अगडे और पिछडे दोनो बडी ताकत
भाजपा के पास वर्तमान में यह सीट है। इस सीट पर मंदसौर संसदीय क्षेत्र से आठ बार सांसद रहे डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय के पुत्र राजेन्द्र पांडेय विधायक है। यह उनकी दुसरी बारी है। हालांकि इस बार भी उनकी टिकट फायनल बतायी जा रही है लेकिन मालवा में किसान आंदोलन के उपरांत जो स्थिति दिखायी दे रही है उसके कारण भाजपा जिलाध्यक्ष कानसिंह चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेडा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष स्व प्रहलाद पोरवाल के पुत्र सुनिल पोरवाल भी दावेदार बने हुये है। कांग्रेस की तरह भाजपा में इस सीट पर प्रतिस्पर्धा हालांकि कम है जिसका कारण वर्तमान विधायक का फिर से टिकट फायनल होने की अटकले मुख्य कारण है लेकिन अगर पार्टी आला कमान अगर अन्य नामो पर विचार करता है तो फिर इस सीट पर भाजपा के कई अन्य दावेदार भी खुले रूप से सामने आने की संभावना है।
कांग्रेस के लिये मीनाक्षी और सिंधिया तो भाजपा का अपना ही टिकट तय करने का फामूला
कांग्रेस के लिये यह सीट परंपरागत सीटो में से मानी जाती थी लेकिन पिछले दस सालो से यहां की राजनिति मे ंउतार चढाव आने के बाद अब यह सीट कांग्रेस के लिये पहले जैसी आसान नही रही है। वर्तमान में मंदसौर संसदीय क्षेत्र से मीनाक्षी नटराजन की इंट्री के बाद पिछली बार यह सीट मुस्लिम वर्ग के खाते मे चली गयी थी लेकिन यहां से कांग्रेस उम्मीदवार की तीस हजार से अधिक मतो से हार के बाद इस सीट पर फिर से सिंधिया खेमे का दावा मजबूत हुआ है। पूर्व मंत्री महेन्द्रसिंह कालूखेडा के अनुज केकेसिंह कालूखेडा सिंधिया खेमे की ओर से मैदान में है तो डॉ हमीरसिंह राठौड के रूप में एक बडा नाम दोनो नेताओं के सामने मजबूत दस्तक दे रहा है। भाजपा के लिये टिकट तय करने का आंकलन का फामूला सर्वे के अलावा वर्तमान विधायक के प्रति आमजन का रिर्पोट कार्ड होगा। इस बार जावरा विधानसभा से पिछले बार की तुलना में भाजपा में भी कडी प्रतिस्पर्धा दिखायी दे रही है।

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