जिले की सुदूर किन्तु राजनैतिक दृष्टी से प्रतिष्ठा का विषय रही है गरोठ विधानसभा

मंदसौर। गरोठ विधानसभा मंदसौर जिले की उन विधानसभाओ में शुमार रही है जहां के नेतागण अलग जिले की मांग लगातार उठाते रहे है। गांधी सागर डेम और अभ्यारण की सुंदरता मंदसौर जिले के साथ ही पुरे प्रदेश में इस क्षेत्र को अलग पहचान दिलाती है। राजनैतिक रूप से यह सीट भाजपा और कांग्रेस दोनो के लिये अहम मानी जाती है। दो वर्ष पूर्व गरोठ विधानसभा में हुये उपचुनाव में बेशक बाजी शिवराज की मेहनत के दम पर भाजपा के हाथ लगी हो लेकिन इस बार कांग्रेस फिर से इस सीट को हथियाने के लिये जी तोड मेहनत करेगी।
अब तक गरोठ विधानसभा के ये रहे है समीकरण
अब तक गरोठ विधानसभा के लिए 15 चुनाव हो चुके हैं। यहां सबसे बड़ा वोट समूह पिछड़ा वर्ग या अन्य का है। 13 बार सामान्य वर्ग से विधायक चुनकर आए। दो बार पिछड़ा वर्ग से।क्षेत्र में सबसे बड़ा समूह सौंधिया समाज है। इसके बाद मीणा, फिर बंजारा इसके बाद अजा और अजजा है। बावजूद किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक इन्हें मौका नहीं दिया। 1977 में हुए उप चुनाव में पावटी के सौंधिया समाज के पर्वतसिंह को भाजपा ने मौका दिया था, लेकिन वे भी कांग्रेस के माणकलाल अग्रवाल के सामने हार गए। इसके बाद सीतामऊ क्षेत्र से विधायक रह चुके नानालाल पाटीदार ने भाजपा की ओर से 1985 में पूर्व विधायक सुभाषकुमार सोजतिया के सामने चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए।
इस सीट पर गरोठ का प्रतिनिधित्व भी कम-भले विधानसभा गरोठ हो लेकिन इस पर गरोठ के लोगों प्रतिनिधित्व करने का मौका कम ही मिला। पहली विधानसभा 1952 में गरोठ के बापूलाल चौधरी मनोनीत हुए थे। इसके बाद 1962, 67 और 80 में मोहनलाल सेठिया विधायक रहे। एक बार 1972 में कस्तूरचंद चौधरी विधायक रहे। इसके अलावा सभी विधायक भानपुरा या भानपुरा क्षेत्र के रहे।
कांग्रेस से ये नेतागण कर रहे है दावा
गरोठ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री सुभाष सोजतिया फिर से दावेदारो की कतार में प्रथम पंक्ति में खडे है, हालांकि उप चुनाव हार जाने के बाद उनका टिकट कटने के कयास लगाये जा रहे है। इसके अलावा किशनसिंह पावटी, प्रदेश कांग्रेस महासचिव मुकेश काला, युवा नेता अनुप व्यास, जिला पंचायत सदस्य त्रिलोक पाटीदार, तूफानसिंह सिसोदिया, दिलीप तिल्लानी, मनोज पाटीदार यहां से कांग्रेस के मुख्य दावेदारो में शुमार है।
भाजपा ये नेतागण है दावेदारी की कतार में
भाजपा के खाते में चल रही इस सीट पर भाजपा से वर्तमान विधायक चंदरसिंह सिसोदिया, भाजपा जिलाध्यक्ष देवीलाल धाकड, पूर्व विधायक पुत्र विनित राजेश यादव, गरोठ नरगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजेश चौधरी, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंद्रप्रकाश पंडा मुख्य दावेदार हैं।
वर्तमान में ये है मुख्य चुनावी मुददे
मंदसौर जिले से ताल्लुक रखने के बावजुद इस सीट पर कई मुददे भिन्न है। इस सीट पर किसानो को उपज का सही दाम नही मिलना, केन्द्र व राज्य सरकार से जुडे मुददो के अलावा पृथक जिले की मांग, अभ्यारण क्षेत्र में विकास, चंबल का पानी ग्रामो में नही पहुंचने के अलावा राजस्थान से जुडे होने के बावजुद क्षेत्र का समुचित विकास नही होने मुख्य चुनावी मुददा है। इस सीट पर पृथक जिले की मांग का समर्थन दोनो दलो के नेतागण कर रहे है लेकिन इस मांग को लेकर के फिलहाल कोई विशेष रूझान आम नागरिको के बीच दिखायी नही देते है।

ये है गरोठ विधानसभा का जातिगत समीकरण
गरोठ विधानसभा में सौधिया राजपूत, मीणा, बंजारा, अजा/अजजा, जांगडा पोरवाल, पाटीदार, गुर्जर- गायरी, जैन, बाह्मण, साहू , माली, बोहरा, दर्जी, नाई, बंगाली, व अन्य जातियो के मतदाता भी इस सीट पर मौजुद है। मुख्य रूप से यहां पर सौधिया राजपूत, जांगडा पोरवाल, मीणा, बंजारा समाज के मतदाता अच्छी संख्या में है जो जीत हार तय करने में मुख्य भूमिका निभाते है।
अब तक ये रहे विधायक
गरोठ विधानसभा से 1952 बापूलाल चौधरी, 1957 विमलकुमार चौरडिय़ा, 1962 मोहनलाल सेठिया, 1967 मोहन लाल सेठिया, 1969 माणकलाल अग्रवाल, 1972 कस्तूरचंद चौधरी, 1977 रघुनंदन शर्मा, 1980 मोहनलाल सेठिया, 1985 सुभाषकुमार सोजतिया, 1990 राधेश्याम मांदलिया, 1993 सुभाषकुमार सोजतिया, 1998 सुभाषकुमार सोजतिया, 2003 राजेश यादव, 2008 सुभाषकुमार सोजतिया, 2013 राजेश यादव, 2015 चंदरसिंह सिसोदिया यहां से चुनाव जीतने में सफल रहे।

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