बिहार में बराबर-बराबर सीटों पर लड़ेगी जेडीयू और बीजेपी, दो-तीन दिनों में होगा संख्या का एलान: अमित शाह

नई दिल्ली: बिहार में सीट बंटवारे पर जारी कवायद के बीच बड़ी खबर आई है. आज सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की. इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अमित शाह ने कहा कि बिहार में जेडीयू और बीजेपी बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक-दो दिनों में सीटों की संख्या का एलान कर दिया जाएगा.

अमित शाह ने कहा कि बिहार में एनडीए पिछली बार से भी ज्यादा सीटें जीतेगी. उन्होंने कहा कि बिहार में बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी और आरएलएसपी साथ में लड़ेगी. अमित शाह ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा हमारे साथ हैं, वे एनडीए में ही रहेंगे. उन्होंने कहा कि कौन पार्टी कहां से चुनाव लड़ेगी ये बिहार की यूनिट तक करेगी. सभी पार्टियों से एक-दो नेता बैठकर इसका एक खांका खींचेंगे. उन्होंने कहा कि सभी पार्टी इस बात पर सहमत हैं कि एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए.

वहीं नीतीश कुमार ने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर चर्चा हो चुकी है और उसपर सहमति है. जेडीयू और बीजेपी बराबर-बराबर सीटों पर लड़ेगी और बाकी लोगों की सीटों की संख्या के बारे में अंतिम दौर में बातचीत चल रही है. दो तीन दिनों के भीतर सीटों की संख्या की घोषणा हो जाएगी. एक बार जब सीटों के संख्या की घोषणा हो जाएगी तो कौन पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी ये फैसला कर लिया जाएगा. इन सब चीजों में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. नीतीश कुमार ने भी बताया की उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हुई और बिहार की मौजूदा स्थिति से उन्हें अवगत कराया है. बिहार के 23 जिले के 206 प्रखंडों को हमलोगों ने पहले फेज में सूखाग्रस्त घोषित किया है, इसकी जानकारी दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के और अलग-अलग मुद्दों पर प्रधानमंत्री से बातचीत हुई है.

जेडीयू ने बीजेपी को सीट बंटवारे का 50-50 फॉर्मूला दिया है. इसके तहत पहले गठबंधन में सहयोगी पार्टी एलजेपी और आरएलएसपी को सीटें दे दी जाएं और बाकी बची सीटों को जेडीयू और बीजेपी में बराबर बराबर यानि 50-50 बांट दिया जाए. गठबंधन में अन्य दलों को कितनी सीटें दी जाएंगी इसको लेकर जेडीयू को कोई आपत्ति नहीं हैं. एलजेपी और आरएलएसपी के लिए सीटों का फैसला बीजेपी को करना है. इसके लिए पिछले विधानसभा चुनाव को आधार बनाया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक 2019 में NDA के गठबंधन दलों को यानी एलजेपी और आरएलएसपी को उतनी सीटें नहीं मिल पाएंगी जितनी 2014 में उनके हिस्से आई थी.

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