अत्याचार निवारण समिति में गैर आरक्षित वर्ग के पदाधिकारियो का मनोनयन दुर्भाग्यपूर्ण- श्री सलोद


मंदसौर। प्रारंभ से ही भारतीय जनता पार्टी सरकार की मंशा अनूसूचित जाति/जनजाति वर्ग के खिलाफ रही है। केन्द्र से लेकर प्रदेश तक आरक्षित वर्ग पर लगातार होते अत्याचार भाजपा सरकारो की नीति और नियत को उजागर करती है। पिछले दिनो मंदसौर जिले की आदीम जाति कल्याण विभाग की अत्याचार निवारण समिति जिसका कार्य एससी/एसटी वर्ग पर होने वाले अत्याचार पर निगरानी रखना है उसमें गैर एससी/एसटी वर्ग के गैर शासकिय सदस्यो का मनोनयन करके सीधे रूप से शोषित वर्ग का मनोबल तोडने का कार्य किया गया है।
जिला कांग्रेेस अजा विभाग अध्यक्ष एवं पूर्व अत्याचार निवारण समिति सदस्य श्री संदीप सलोद ने पिछले दिनो घोषित समिति में तीन गैर शासकिय सदस्यो के मनोनयन पर गंभीर सवाल खडे किये है। उन्होनें कहा कि जब प्रदेश में कमलनाथजी की सरकार थी तब उन्होने समिति में सदस्य मनोनयन के मामले में इस बात का ध्यान रखा कि जिस वर्ग के लिये समिति बनी है उस वर्ग के ही सामाजिक कार्यकर्ता एवं नेतागण सदस्य बने लेकिन भाजपा सरकार ने समिति में गैर एससी/एसटी सदस्यो का मनोनयन करके अपनी मंशा जाहीर कर दी है कि उनका आरक्षित वर्ग को न्याय दिलाने में कितनी रूचि है।
श्री सलोद ने कहा कि समिति का कार्य होता है कि जातिय रूप से होने वाले अत्याचार के संबंध में होने वाली शिकायतो एवं लंबित प्रकरणो में पीडित पक्ष को न्याय दिलाना लेकिन अफसोस है कि जब पीडित पक्ष के ही गैर शासकिय सदस्य समिति में नही होगे तो आखिर न्याय की आस सरकारी अधिकारियो के उपरांत वे किससे करेगे। यह स्थिति सरकार की असल नियत को उजागर कर रही है। लगातार मंदसौर जिले में दलित वर्ग पर अत्याचार बढे है। विशेषकर सुवासरा एवं मल्हारगढ विधानसभा में अनेक घटनाये हो चुकी है लेकिन उसके बावजुद शिवराज सरकार दलित वर्गो हेतु गठित शासकिय समितियो में अन्य वर्गो के लोगो का मनोनयन कर उनके अधिकारो पर कुटाराघात करने मे लगी है।

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