मंदसौर। पानी और संत जितने ज्यादा क्षेत्र में पहुंचेंगे सृष्टि और मानवता के लिए वरदान बनेंगे। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने धर्मसभा में व्यक्त किए। संतश्री ने कहा कि पानी से सृष्टि मुस्कुराती है और संत से संस्कृति पुष्पित व पल्लवित होती है।
 संतश्री ने कहा कि पानी अगर एक जगह भरा रहेगा तो दुर्गंध पैदा  करेगा और बहता रहेगा तो निर्मल रहेगा।
 मुनिश्री कमलेश ने कहा कि संत एक जगह रहेगा तो आसक्ति का निर्माण हो सकता है, विकृतियां पैदा हो सकती है और चलता रहेगा तो ज्ञान के प्रकाश से पूरे विश्व को आलोकित करता रहेगा।
 राष्ट्रसंत ने कहा कि पानी ना मिला तो एक ही शरीर  का नुकसान है और संत नहीं मिला तो आत्मा का जन्म जन्मांतर में नुकसान है।
 मानव के भीतर छिपी हुई अलौकिक शक्ति को संतवाणी ही जागृत कर सकती है। मानव से महामानव बना सकती है।
धर्मसभा में पूर्व गृहमंत्री कैलाश चावला ने कहा कि संत संस्कृति का श्रृंगार है मानवता का आधार है। मुनि कमलेश जैसे बौद्धिक विद्वान संतों का चातुर्मास हमारे यहां वरदान है।
विधायक यशपाल जी सिसोदिया ने कहा कि संत के साथ – साथ समाज सुधारक राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं को दूर करने में आपका अभूतपूर्व योगदान रहा है। इस मौक़े पर आपने जैन दिवाकर कमल गौशाला सिंदपन के लिए एंबुलेंस की घोषणा की।
रेडक्रॉस सोसायटी अध्यक्ष प्रीतेश चावला ने कहा कि मानव सेवा ही माधव सेवा का मूल मंत्र है।
पत्रकार संघ के अध्यक्ष बृजेश जोशी ने कहा कि आपकी निर्भीक बेबाक टिप्पणियां शासन – प्रशासन को झकझोर देती है। नगर पालिका अध्यक्ष रामादेवी गुर्जरने ने नागरिक अभिनंदन करते हुए कहा कि संतश्री का  मार्गदर्शन ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण है। नपा उपाध्यक्ष नम्रता चावला ने कहा संतश्री द्वारा गौशालाओं के लिए दिया योगदान सदियों तक धरती याद करेगी।
  मुनि कमलेश के चातुर्मास विदाई समारोह में धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के प्रमुख ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच दिल्ली मंदसौर की ओर से सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन विजय खटोड ने किया।