मंदसौर। पिछले दिनों बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन को बडी क्षर्ति पहुंची। इसके उपरांत लगातार सर्वे की मंाग के उपरांत सर्वे का कार्य हुआ और आमजन को यह उम्मीद है कि मध्यप्रदेश सरकार राहत के तौर पर राहत राशि प्रदान करेगी किन्तु अब तक न तो प्रशासन ने नुकसानी के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट की है और नही इस बात के संकेत दिये है कि प्रभावित किसानो को कब और किस मापदंड के आधार पर मुआवजा मिलेगा जिसके चलते प्रभावित किसान भ्रम की स्थिति में है।
        प्रदेश कांग्रेस महामंत्री एवं एआईसीसी डेलिगेट श्री प्रवीण मांगरिया ने कहा कि मल्हारगढ विधानसभा सहित पुरे जिले में बारिश के कारण खरीफ फसल को नुकसान हुआ है विशेषकर सोयाबीन फसल में भारी क्षर्ति देखने को मिली। पकने की कगार पर आयी फसल पर बारिश के कहर के कारण लगभग पचास प्रतिशत नुकसान फसलो में देखने को मिला है किन्तु उसके बावजुद राजस्व विभाग के माध्यम से प्रशासन ने सर्वे कार्य  करवाया किन्तु सर्वे कार्य करने वाले पटवारी और अन्य स्टाफ मात्र दस से पंद्रह प्रतिशत नुकसानी की ही बात दबी जुबान में स्वीकार करते हुये फसल बीमा पर जोर दे रहे है जिससे यह संकेत मिलता है कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी प्रभावित किसानो को मुआवजा के तोर पर राहत राशि मिलती हुई नही दिख रही है।
     श्री मांगरिया ने सर्वे कार्य उपरांत जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग के संकेत किसान हित में नही है। इस स्थिति में जिला प्रशासन खरीफ फसल में नुकसानी की स्थिति स्पष्ट करते हुये प्रभावित किसानो को मुआवजा के तौर पर राहत राशि कब और किस मापदंड के आधा पर मिलेगी स्थिति स्पष्ट करे जिससे संकटग्रस्त किसानो को ढांढस बंध सके।